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जॉन.बि. एटनसाफ आईवा स्टेट यूनिवर्सिटी का एसा ब्यक्ति था . जिसने वाल्व का उपयोग करके सन 1930 में पहला इलेक्ट्रानिक कम्पुटर बनाया था . यह सन 1942 में पूर्ण हुआ.इसमे एड व सबट्रेकट इकाई थी . व इसका अकार छोटा था . व इसमें लगभग 300 वाल्व उपयोग किये गए थे . इसकि मेमोरी इकाई में एक घूमते हुए ड्रम पर कैप्सितर लगे होते थे .. प्रत्येक कैप्सिटर बायनरी का एक अंक संग्रह कर सकता था. इसमे कई इनपुट / आउटपुट उपकरण थे जैसे पंच कार्ड या कार्ड रीडर इत्यादि .

                सबसे पहला जनरल परपज कम्पुटर पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में जॉन डब्लू . मचली तथा जे. प्रेसपर येकर्ट के निर्देशन में बना .जिसका नाम ENIAC प्रोजेक्ट के सलाहकार जॉन वान न्यूमेन थे. यह एक बहुत बड़ी मशीन थी . जो लगभग तिस टन की थी . व इसमे लगभग 1800 वैक्यूम टूबस थे . यह किसी जोड़ प्रक्रिया के लिए 200 माइक्रोसेकण्ड तथा  10 दश अंको के गुणा के लिए 3IRS (मिली सेकण्ड ) लेता था. इसके अपरेसन (क्रियान्वयन) के लिए बायनरी नंबर का उपयोग न करते हुए . डेसीमल नंबर का उपयोग करता था .EDVAC (इलेक्ट्रॉनिक डिसकृत वेरिएबल ऑटोमेटिक कम्पुटर) कम्पुटर में स्टोर्ड प्रोग्राम के क्रियान्वयन के साथ , डाटा  तथा प्रोग्राम दोनों को संग्रह करने के लिए किया गया . इस मत को सन 1945 में जॉन वान  न्यूमेन ने प्रतिपादित किया था , परन्तु इस मशीन ने कार्य करना सन 1951 में शुरू किया तथा यह मशीन डेसीमल नंबर की जगह बायनरी नंबर का उपयोग करती थी. IAS (इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज) का एक और न्य कम्पुटर था . जिसको की वान न्यूमेन व कालेज के साथियो ने प्रिंसटेन के इंस्टिट्यूट ओफ एडवांस स्टडीज में सन 1946 से सन 1952 के बिच बनाया गया था . इसमें इसमे आधुनिक कम्पुटर के समस्त गुण जैसे रैंडम एक्सेस , मुख्य म्मेमोरी , पेरेलल बायनरी सर्किट तथा एक ओपरेसन में एक वर्ड को अक्सेस्स करना  इत्यादि थे.
कम्पुटर का इतिहास : कम्पुटर के इलेक्ट्रिकल विकास का इतिहास

                  इस कम्पुटर की कार्य करने की गति हावर्ड Mark-1 की अपेछा 5000 गुनी अधिक थी. ENIAC से 5000 जोड़ अथवा 350 गुणा व भाग की गणनाए करता था तथा उन गड़नाओ का संग्रहण अपनी स्मृति में अस्थायी रूप से संग्रहित कर , अगली गड़ना करने के लिये तैयार हो जाता था . उस समय के नए सैनिक हथियारों की मापक दूरियों का निर्धारण करने में अमेरिकी सेना ने इस कम्पुटर का उपयोग किया . विश्वयुद्ध लो त्रासदी  हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमों का प्रयोग करने हेतु सम्बन्धित गड़ना - कार्य इसी कम्पुटर पर किया गया था . यह कम्पुटर आकार में बहुत बड़ा था. इसका भार लगभग 30 टन  था. इस कंप्यूटर में 18000 वैकुम ट्यूब्स ,70000 रजिस्टर , 10000 संधारित एवं 6000 स्विच का प्रयोग किया गया था. ईस  कंप्यूटर को चलाने के लिए 150 वाट वैद्युत शक्ति की आवश्यकता होती थी.

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