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Trade War 2025
Image by Wolfgang Weiser from Pixabay

📌 Updated: 30 August 2025

ट्रम्प सरकार के 50% tariffs ने India–US रिश्तों में खटास बढ़ा दी है। सवाल यह है कि क्या यह झटका भारत की foreign policy को नई दिशा देगा और भारत चीन–रूस के साथ और नज़दीकियों की ओर बढ़ेगा?

📝 प्रस्तावना (Introduction) 

भारत और अमेरिका का रिश्ता हमेशा “दोस्ती और दूरी” के बीच झूलता रहा है। कभी defence deals और technology partnership ने इसे मजबूत किया, तो कभी trade imbalance और geopolitical differences ने खटास डाल दी। लेकिन 2025 में हालात अचानक बदल गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक tariffs बढ़ा दिए। 
यह सिर्फ़ एक व्यापारिक फैसला नहीं था, बल्कि foreign policy को भी झकझोर देने वाला कदम था। 
  • Who? इस फैसले से प्रभावित कौन हुआ? 
  • How? यह trade war कैसे शुरू हुआ और geopolitics इसमें क्यों घुस आया? 
  • Why? भारत को चीन और रूस के करीब क्यों जाना पड़ सकता है? 

1️⃣ Trade War 2025 की शुरुआत 

  • अचानक झटका: जून 2025 की एक सुबह जब समाचार आया कि अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले textiles, gems और seafood पर 50% tariffs लगा दिए हैं, तो व्यापार जगत सकते में रह गया। 
    • 👉 Story: सूरत के diamond exporter मनोजभाई ने कहा, “हमारे पास पहले से orders booked थे। लेकिन buyers ने तुरंत फोन कर कहा कि ‘अब cost दोगुनी होगी, हमें rethink करना पड़ेगा।’ हमें लगा जैसे किसी ने पैरों तले ज़मीन खींच ली।” 
  •  Geopolitical कारण: भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। यह फैसला घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी था, लेकिन वॉशिंगटन को यह कदम एक सीधी चुनौती लगा। 
    • 👉 Story: दिल्ली के energy analyst समीर जैन कहते हैं, “भारत को survival चाहिए था, अमेरिका को loyalty। यही टकराव trade war का असली बीज है।”
  •  Political Motivation: अमेरिकी चुनावी माहौल में Trump को अपनी ‘America First’ छवि और मजबूत करनी थी। India को target करना एक आसान optics बन गया। 

2️⃣ कौन सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ? (Who is affected) 

  • Exporters & SMEs: तमिलनाडु के तिरुपुर का textile hub पहले से ही competition झेल रहा था। अब buyers Vietnam और Bangladesh की ओर जा रहे हैं। 
    • 👉 Story: exporter अरुण का कहना है, “US से हमारे 40% orders आते थे। tariff news के बाद buyer ने साफ़ कह दिया — हमें cheaper alternative देखना होगा।” 
  •  Workers & Artisans: सूरत में diamond polishing units के workers को अचानक छुट्टियाँ दे दी गईं। 
    • 👉 Story: 22 साल के इरफ़ान कहते हैं, “हम रोज़ 10 घंटे काम करके परिवार चलाते हैं। अब owner कह रहे हैं कि orders नहीं हैं। घर का खर्च कैसे चलेगा?” 
  •  Consumers in US: New Jersey की एक Indian-American family कहती है, “पहले जो gold bangles $500 में मिलते थे, अब $750 हो गए हैं। ये burden हम पर भी आ गया।” 
 👉 यानी यह trade war केवल exporters या governments का मामला नहीं है — इसका असर border के दोनों तरफ़ आम लोगों पर हो रहा है। 

 3️⃣ यह Trade War कैसे और क्यों शुरू हुआ? (How & Why) 

  • How (कैसे): 
    •  अमेरिका लंबे समय से trade deficit की शिकायत करता रहा है। 
    • भारत ने agriculture और tech imports पर ऊँचे duties रखे। 
    •  रूस से तेल खरीद US के sanctions के खिलाफ गई। 
  •  Why (क्यों): 
    •  चुनावी optics: Trump voters को दिखाना चाहते थे कि वे jobs और economy के रक्षक हैं
    • Geopolitics: India का neutral stand US को खटक रहा था। 
    • Domestic politics: India को target कर tough leader image बनाना। 
  •  👉 Narrative: असल में यह war “economics vs politics” की जंग है — एक तरफ भारत का survival, दूसरी तरफ अमेरिका का election game। 

 4️⃣ भारत की Foreign Policy Dilemma 

  • US Relations under stress: 
    • Defence deals चल रहे हैं, लेकिन trust टूट रहा है। 
👉 Story: defence expert रजनीश सिंह कहते हैं, “आप एक तरफ drones पर discussion कर रहे हैं और दूसरी तरफ same country आपके exporters को चोट पहुँचा रही है। यह double game है।” 
  • Neighbourhood Pressure: चीन पहले से US tariffs झेल रहा है। अब भारत भी उसी list में है। Beijing कह रहा है, “देखा, हम अकेले नहीं हैं।”
  •  Russia Factor: भारत को energy security चाहिए। रूस से सस्ता crude खरीदना मजबूरी है। sanctions के बावजूद यह रिश्ता और गहरा हो गया। 
👉 भारत अब एक crossroad पर खड़ा है — US को खुश रखे या अपनी जरूरतों को प्राथमिकता दे। 

5️⃣ क्या भारत चीन–रूस के और करीब जाएगा? 

  •  China Angle – Compulsion vs Conflict 
    • भारत और चीन के बीच सीमा विवाद है, लेकिन व्यापार में चीन सबसे बड़ा partner बना हुआ है। 
👉 Story: नोएडा के एक mobile parts निर्माता राजीव बताते हैं, “हमारे पास पहले US से bulk orders आते थे। tariff के बाद buyers पीछे हट गए। दो हफ्ते भी नहीं बीते कि Shanghai के buyer ने call कर दिया। politics चाहे जैसी हो, business को buyer चाहिए।” यानी border tension ज़रूरी है, पर बाज़ार की ज़रूरतें उससे अलग चलती हैं। 
  • Russia Angle – Energy as Lifeline 
    • भारत की energy demand लगातार बढ़ रही है और Russia अब सबसे बड़ा supplier बन चुका है
👉 Story: मुंबई की एक refinery official नीलिमा कहती हैं, “Russian crude के बिना हमारी cost दोगुनी हो जाएगी। यह सिर्फ़ economics नहीं, survival है।” sanctions के बावजूद India–Russia energy bond और मज़बूत होता दिख रहा है। 
  • Strategic Forums (BRICS & SCO) 
    • भारत पहले ही BRICS और SCO में active है। trade war ने इन platforms को और meaningful बना दिया है। 
👉 Experts मानते हैं कि अगर US pressure और बढ़ा, तो India naturally इन alliances को गहरा करेगा। 
👉 यानी India का tilt China–Russia की ओर accidental नहीं, बल्कि compulsions-driven है। 

6️⃣ क्यों भारत तुरंत US को नहीं छोड़ सकता? 

  • Defence Deals 
    • India की military modernisation में US का critical role है। F-21 jets, drones और technology transfers को अचानक ignore नहीं किया जा सकता। 
👉 Story: defence expert लेफ्टिनेंट (रिटा.) रजनीश कहते हैं, “भारत को Russia से तेल चाहिए, लेकिन अमेरिका से defence tech। अगर एक छोड़ दिया, तो दूसरा भी risk में जाएगा।” 
  • IT & Services Exports 
    • Silicon Valley companies heavily depend on Indian talent। 
👉 Story: बेंगलुरु की एक IT कंपनी के CEO रोहित कहते हैं, “हमारी 60% revenue सिर्फ़ US clients से आती है। अगर वो टूटे तो हजारों engineers jobless हो जाएंगे।” 
  •  Indian Diaspora 
    • 40 लाख से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी न सिर्फ़ economy बल्कि politics में भी influence रखते हैं। 
👉 Narrative: Indian-Americans ने हमेशा India–US ties को bridge की तरह support किया है। 
👉 इसलिए भारत पूरी तरह US से break नहीं कर सकता। 

7️⃣ भारत की संभावित रणनीति 

  • Market Diversification 
    • Middle East और Africa के साथ trade push बढ़ाना। 
👉 Story: FIEO official कहते हैं, “हमारे exporters को अब हर shipment के लिए alternate buyer ढूँढना होगा। यही survival है।” 
  • Support to MSMEs 
    • सरकार working capital support और export subsidies पर जोर दे रही है। 
👉 Narrative: Textile associations मांग कर रही हैं कि interest subvention schemes को दुगना किया जाए। Diplomatic Balancing India backchannel talks भी चला रहा है और parallel alliances भी strengthen कर रहा है। 
👉 Story: एक foreign policy advisor कहते हैं, “भारत अब tightrope walk कर रहा है — न पूरी तरह West camp में, न East camp में।” 

8️⃣ अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण 

  • US Analysts 
    • मानते हैं कि Trump की tariff strategy allies को दूर धकेल रही है। 
👉 Story: Washington Post ने लिखा, “India को tariffs से चोट पहुँचाना Trump का short-term gain हो सकता है, लेकिन long-term में यह America की credibility को कमजोर करेगा।” 
  • China & Russia 
    • दोनों इस conflict को अपने influence बढ़ाने का अवसर मान रहे हैं। 
👉 Narrative: Russian media headlines पहले ही कह चुकी हैं — “India ने West के दबाव के बावजूद Russia से oil खरीद जारी रखा — यह नया global south order है।” 
  • EU Nations 
    • Europe भी US–China rivalry से परेशान है। अब India उन्हें एक neutral partner के रूप में आकर्षक लग रहा है। 
👉 International chessboard पर India अब “swing power” है — जो चाहे East की ओर झुक सकता है, चाहे West की ओर। 

9️⃣ निष्कर्ष 

Trade War 2025 ने India–US ties को सबसे कठिन दौर में पहुँचा दिया है। 
  • सूरत का artisan orders खो रहा है। 
  • तिरुपुर का textile exporter buyers की emails पढ़कर परेशान है। 
  • आंध्रप्रदेश का fisherman अपने shipment बंद होने से कर्ज़ चुकाने की चिंता में है। 
  •  दिल्ली के policy makers अब Russia और China के साथ deeper talks करने को मजबूर हैं। 
👉 भारत की foreign policy अब multi-alignment पर टिकेगी। सवाल यह है कि क्या India इस balancing act को लंबे समय तक निभा पाएगा, या फिर उसे किसी एक camp का हिस्सा बनना पड़ेगा।

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