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US–India Trade War 2025
Image by Wolfgang Weiser from Pixabay

📌 Updated: 30 August 2025

अमेरिका के नए टैरिफ फैसले ने भारतीय exporters की रातों की नींद उड़ा दी है। Textiles, Jewellery और Seafood sectors पर सबसे बड़ा असर देखा जा रहा है।

प्रस्तावना (Introduction)

भारत और अमेरिका का रिश्ता हमेशा से व्यापार, राजनीति और रणनीति का संगम रहा है। लेकिन 2025 की गर्मियों में इस रिश्ते पर ऐसा बादल छा गया है, जिसकी गूंज दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक सुनाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर अचानक 50% तक tariff बढ़ा दिया। यह सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि ₹40 अरब तक के निर्यात और 20 लाख नौकरियों का सवाल है।

यहाँ हम जानेंगे —

  • Who? इस निर्णय से सबसे ज्यादा प्रभावित कौन हैं?
  • How? यह trade war कैसे शुरू हुआ और किन वजहों से?
  • Why? यह हमारे लिए कितना गंभीर है और भारत क्या कर रहा है?

1️⃣ Trade War 2025 की पृष्ठभूमि

भारत–अमेरिका रिश्ते हमेशा से सहयोग और टकराव के बीच झूलते रहे हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत हर साल लगभग $87 बिलियन का निर्यात करता है।

  • मुख्य उत्पादों में कपड़े (Textiles), गहने (Jewellery), दवाइयाँ (Pharma), समुद्री खाद्य (Seafood), चमड़ा और केमिकल्स आते हैं।
  • लेकिन 2025 में हालात अचानक बदले। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, जिसे अमेरिका ने geopolitical चुनौती माना।
  • ट्रम्प प्रशासन ने "सख्त रुख" अपनाते हुए भारत पर दोगुने tariff लगा दिए।

👉 यह कदम केवल अर्थशास्त्र नहीं बल्कि राजनीति और दबाव की रणनीति थी।

2️⃣ अमेरिकी Tariffs: किस पर और कितना असर?

अमेरिका ने जिन उत्पादों पर tariffs बढ़ाए, वे भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

  • Textiles & Apparel: तिरुपुर और सूरत जैसे hubs पहले ही rising costs से जूझ रहे थे। अब buyers US से alternatives ढूँढने लगे हैं। हजारों छोटे units को बंद होने का खतरा है।
  • Jewellery & Gems: जयपुर और सूरत के कारीगर अपने designs के लिए globally famous हैं। लेकिन tariff बढ़ने के बाद उनके luxury products US consumers को महंगे पड़ेंगे। orders कम होना लगभग तय है।
  • Seafood (Shrimp & Fish): ओडिशा और आंध्रप्रदेश के हजारों मछुआरे और exporters US demand पर निर्भर हैं। अब tariff के कारण उनका export महंगा हो जाएगा, जिससे incomes पर गहरा असर पड़ेगा।
  • Furniture & Leather: पहले से ही Chinese competition से दबे हुए इस सेक्टर के लिए survival और मुश्किल हो गया है।

👉 अनुमान है कि भारत के कुल export का 55% हिस्सा इस झटके से प्रभावित होगा।

3️⃣ कौन हैं सबसे ज़्यादा प्रभावित? (Who is affected)

  • छोटे Exporters और SMEs: जिनके पास नए markets explore करने की capacity नहीं है। उनके margins इतने कम हैं कि 50% tariff survival को असंभव बना देता है।
  • Artisans और Workers: छोटे कस्बों और गाँवों के लाखों कारीगरों की रोज़ी-रोटी इसी export chain पर टिकी है। Textile, Jewellery और seafood hubs में 20 लाख नौकरियाँ खतरे में हैं।
  • Consumers in US: यह एक hidden impact है। tariffs का असर सिर्फ़ भारत पर नहीं, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा क्योंकि उन्हें वही सामान अब महंगे दाम पर मिलेगा।

👉 यानी यह केवल “India’s problem” नहीं, बल्कि global supply chain का crisis है।

4️⃣ यह Trade War कैसे शुरू हुआ? (How did it start) 

  • Geopolitics का Factor: रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका चाहता था कि दुनिया रूस से दूरी बनाए। लेकिन भारत ने अपने energy needs को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। इसने वॉशिंगटन को खटकना शुरू किया। अमेरिका के लिए यह सिर्फ़ एक व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक चुनौती थी। दिल्ली का यह निर्णय अमेरिका के “pressure tactics” को चुनौती देता दिखा। 
  •  Trade Balance का Factor: अमेरिका वर्षों से कहता आ रहा है कि भारत उसके products पर ऊँचे import duty लगाता है। उदाहरण के तौर पर अमेरिकी agriculture products और high-tech goods को भारतीय बाज़ार में उतनी आसानी नहीं मिलती जितनी भारतीय सामान को अमेरिका में मिलती है। यह असंतुलन लंबे समय से तनाव का कारण रहा है। 
  • Political Factor: अमेरिका चुनावी साल से गुजर रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प को अपनी “America First” छवि को मजबूत करना था। भारत जैसे बड़े पार्टनर पर tariff दोगुना करना उनके लिए एक “सख्त और निर्णायक” कदम साबित हो सकता था। 
 👉 यानी यह trade war केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि भूराजनैतिक दबाव और चुनावी राजनीति का परिणाम है। 

5️⃣ क्यों यह मामला गंभीर है? (Why is it important) 

  • Export Dependence: भारत के textiles, gems, seafood जैसे कई सेक्टर अमेरिका पर export के लिए अत्यधिक निर्भर हैं। tariff बढ़ने से यह dependence अब एक weakness बन गई है। 
  • 20 लाख नौकरियाँ दांव पर: तिरुपुर के कपड़ा उद्योग से लेकर आंध्रप्रदेश के मछुआरों तक, लाखों कामगारों की रोज़ी-रोटी export orders पर टिकी है। tariff का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा। 
  • SMEs का Survival: भारत के छोटे और मंझोले उद्योग (SMEs) इस झटके से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। उनके पास न तो बड़े buyers हैं और न ही इतना पूंजी भंडार कि लंबे समय तक नुकसान झेल सकें।
  • Foreign Policy Angle: यह मामला सिर्फ़ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। Indo-Pacific रणनीति, Quad जैसी साझेदारियाँ और defence deals भी इस तनाव से प्रभावित हो सकती हैं। 
 👉 इसलिए यह trade war सिर्फ़ “निर्यात कम होने” की कहानी नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों के लिए चुनौती है। 

6️⃣ भारत की प्रतिक्रिया और रणनीति 

  • Financial Support Packages: भारत सरकार ने exporters के लिए राहत पैकेज तैयार किए हैं। loans पर ब्याज दरों में राहत, tax exemptions और working capital support देने की घोषणाएँ हुई हैं। 
  • Export Diversification: भारत अब EU, Middle East और Africa की ओर रुख कर रहा है। सरकार और FIEO (Federation of Indian Export Organizations) exporters को नए बाजार खोजने में मदद कर रहे हैं। 
  • MSME Support: MSME मंत्रालय छोटे exporters के लिए विशेष क्रेडिट लाइन और subsidy schemes लॉन्च कर रहा है। यह कदम लाखों छोटे उद्यमों को collapse होने से बचाने के लिए है। 
  • Diplomatic Negotiations: भारत और अमेरिका के बीच backchannel talks जारी हैं। दिल्ली यह संदेश देना चाहती है कि भारत एक स्वतंत्र foreign policy अपनाएगा लेकिन अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते भी बनाए रखेगा। 
 👉 भारत immediate relief और long-term strategy दोनों पर काम कर रहा है। 

7️⃣ भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर 

  • Short-term Impact: Textile, gems और seafood exporters पहले ही orders cancel होते देख रहे हैं। कई छोटे units production scale down कर रहे हैं। इससे jobs का pressure बढ़ रहा है। 
  • Medium-term Impact: MSMEs की financial स्थिति कमजोर हो रही है। कई units loan default की कगार पर हैं। banks और NBFCs को भी इसका असर झेलना पड़ सकता है। 
  • Long-term Impact: भारत को अपनी export strategy बदलनी होगी। Supply chains का diversification अनिवार्य है। साथ ही, global competitiveness बढ़ाने के लिए R&D और technology adoption पर ध्यान देना पड़ेगा। 
👉 GDP growth rate पर भी दबाव बढ़ेगा। Analysts का मानना है कि अगर यह trade war लंबा खिंचता है, तो भारत की growth 0.5–1% तक प्रभावित हो सकती है। Amazon–Flipkart ने रोकी Festive Sale की घोषणा

8️⃣ अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण 

  • US की Credibility पर सवाल: कई analysts मानते हैं कि अमेरिका के इस कदम ने उसकी global credibility को नुकसान पहुँचाया है। allies के साथ trade war छेड़ना उसकी leadership position को कमजोर करता है। 
  • India का Strategic Shift: यह संभव है कि भारत अब चीन और रूस जैसे देशों के साथ अधिक सहयोग की ओर बढ़े। हाल ही में BRICS और SCO summits में भारत की सक्रिय भूमिका इसी दिशा की ओर इशारा करती है। 
  • Global Opportunity: Experts कहते हैं कि crisis हमेशा नए अवसर लाता है। अगर भारत अपने exporters को नए बाजार दिला पाए और domestic production capacity बढ़ाए, तो यह long-term में उसकी स्थिति और मज़बूत करेगा। 
👉 यह trade war भारत के लिए crisis भी है और एक अवसर भी। 

9️⃣ निष्कर्ष 

US–India Trade War 2025 भारत की export economy के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ सूरत का artisan orders cancel होने से परेशान है, वहीं तिरुपुर का textile worker अपनी job खोने से डर रहा है। भारत सरकार exporters को राहत देने और नए markets खोजने में जुटी है। 
👉 आने वाले महीने यह तय करेंगे कि यह trade war भारत की growth story को धीमा करेगा या फिर भारत इसे एक नई रणनीतिक दिशा में बदल पाएगा।

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