वायरलेस मिडिया in computer networking

वायरलेस लेन में हाई फ्रीक्वेंसी के रेडियो सिग्नल , इन्फ्रारेड प्रकाश किरणे या लेजर किरणों की मदद से वर्कस्टेशन और सर्वर या हब के बिच कम्युनिकेशन किया जाता है वायरलेस लेन की आवश्यकता हमें तब पड़ती है जब ऑफिस से बाहर गए किसी ब्यक्ति को किसी नेटवर्क पर जुड़ना हो , या कोए रिमोट कंप्यूटर लेन से जोड़ना चाह रहा हो एसी पुरानी बिल्डिंग ,जहा नेटवर्क केबल लगाना कठिन हो , उनमे इस तकनीक की मदद से लें कनेक्ट किया जा सकता है



वायरलेस मिडिया

वायरलेस लेन के दो प्रकार आजकल प्रचलन में है लाइन – ऑफ़ – साईट और स्केटर्द ब्रॉडकास्ट . जैसा की लाइन- ऑफ़ – साईट के नाम से ही समझ में आती है , इस विधि में वर्क स्टेशन और हब या सर्वर के ट्रांसीवरों के बिच कोए बाधा नहीं आणि चाहिए , इनके बिच में बाधा के आते ही डाटा संचार – क्रम धीमा हो जायेगा या टूट जायेगा और डाटा लेस होने की सम्भावनाये बढ़ जाएगी , लेजर बीम के दवरा किया जाने वाला नेटवर्क कम्युनिकेशन-लाइन-ऑफ़ साईट कोमुनिकेसन ही होता है
स्केटर्द इन्फ्रारेड ट्रांस्मिस्सन का बेहतरीन रूप है . इस विधि में वर्कस्टेशन और हब या सर्वर के ट्रांसीवरों के बिच में आने वाली कोए बाधा डाटा संचार क्रम में बाधा नहीं बन सकती है इस बिधि कार्डमें डाटा के रिसीवर तक पहुचने की सम्भावनाये आश्चर्यजनक रूप में बढ़ जाती है


नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड

किसी भी कंप्यूटर नेटवर्क में कोए भी कंप्यूटर , नेटवर्क केबल व नेटवर्क कार्ड के दवरा ही नेटवर्क से जुड़ता है . इसे नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड या NIC या नेटवर्क अदोप्टर कहते है यह कंप्यूटर के अन्दर मदरबोर्ड स्लॉट पर फिक्स किये जाते है हार्डवेयर  आर्किटेकचर व स्पीड के आधार पर यह तिन प्रकार की होती है
Type
Architecture
Speed
ISA
8,16 BIT
10 MBPS
PCI
32 BIT
10 MBPS
PCI
32 BIT
10/100 MBPS

मार्किट में यह अनेको चिप्सेटो में उपलब्ध है रियलटेक चिप्सेट के लेन कार्ड मार्किट में काफी प्रचलित है



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